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अपनी पहचान मिटाने को कहा जाता है .Rahat Indori latest Shayari


 अपनी पहचान मिटाने को कहा जाता है 


सब की पगड़ी को हवा में उछाला जाए 
सोचता हूं कोई अखबार निकाला जाए 
पीके जो मस्त हैं उनसे तो कोई ख़ौफ़ 
 नहीं पीके जो होश में है उनको संभाला जाए
 आसमा ही नहीं एक चांद भी रहता है यहां 
भूलकर भी कोई पत्थर ना उछाला जाए
 नए एहबान  की तामीर जरूरी है
 मगर पहले हम लोगों को मलबे से निकाला जाए
 अपनी पहचान मिटाने को कहा जाता है 
बस्तियां छोड़कर जाने को कहा जाता है 
पत्तिया रोज़ गिरा जाती है यह जहरीली हवा
 और हमें पेड़ लगाने को कहा जाता


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By profession I am a non linear Editor but by nature I am a writer

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