अपनी पहचान मिटाने को कहा जाता है
सब की पगड़ी को हवा में उछाला जाए
सोचता हूं कोई अखबार निकाला जाए
पीके जो मस्त हैं उनसे तो कोई ख़ौफ़
नहीं पीके जो होश में है उनको संभाला जाए
आसमा ही नहीं एक चांद भी रहता है यहां
भूलकर भी कोई पत्थर ना उछाला जाए
नए एहबान की तामीर जरूरी है
मगर पहले हम लोगों को मलबे से निकाला जाए
अपनी पहचान मिटाने को कहा जाता है
बस्तियां छोड़कर जाने को कहा जाता है
पत्तिया रोज़ गिरा जाती है यह जहरीली हवा
और हमें पेड़ लगाने को कहा जाता





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